Get Your 2018 Horoscope For All Zodiac Signs (foresightindia.com)
 अगर आप भी अपने वर्ष भर की घटनाओ जैसे की परीक्षा में सफलता, व्यापार में उतार-चढ़ाव या स्थानांतरण आदि और मुंथा आपके किस भाव में स्तिथ है और उसका आप पर क्या प्रभाव पड़ रहा है तो आज ही अपनी मुंथा की दशा जान्ने 
किसी जातक का भविष्यफ़ल बताने के लिए सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कारक उसकी जन्मपत्रिका के मुख्य व महत्त्वपूर्ण शुभाशुभ योग, ग्रहस्थिति, विंशोत्तरी दशाएं, योगिनी दशाएं, गोचर, और अन्त में उस जातक का वर्षफ़ल होता हैं।
वर्ष फल(varsphal) के द्वारा हम एक वर्ष में होने वाली घटनाओं का अनुमान लगा सकते हैं।
यह आपके प्रत्येक जन्मदिन से परिवर्तित होता है ना कि कैलेण्डर या पंचांग का वर्ष बदलने से।
इसमें आपके नवीन वर्ष की वर्ष-कुण्डली बनाकर आपका वर्षफ़ल बताया जाता है।
इसमें एक वर्ष की मुख्य एवं आकस्मिक घटनाओं, स्वास्थ्य रोगादि का विचार, पदोन्नति, स्त्री एवं संतान सुख, परीक्षा में सफलता, व्यापार में उतार-चढ़ाव या स्थानांतरण आदि मुख्य विषयों का समावेश रहता है।
वर्षफ़ल में नवग्रहों के सामान मुंथा(muntha) की भी स्थापना की जाती है।मुंथा, मुन्थेस ,वर्षेश तथा वर्षलग्नेष को भी वर्षफ़ल में बहुत महत्व दिया गया है.
मुंथा(muntha) यद्यपि कोई ग्रह नहीं है, फिर भी इसका फल अन्य ग्रह के समान ही महत्वपूर्ण है।
जन्म कुण्डली में मुंथा(muntha) सदैव लग्न में स्थित रहती है और यह प्रति वर्ष एक राशि में , एक माह में ढाई अंश तथा एक दिन में ढाई कला चलती है.
वर्ष कुण्डली में जिस भाव में मुन्था स्थित होती है उस भाव तथा भाव के स्वामी कि स्थिति को देखा जाता है। बली हैं या निर्बल है।
वर्ष कुण्डली के ४, ६, ७, ८और १२वे भाव में स्थित मुंथा अशुभ फलदायक होती है। और ४, ६, ७, ८, १२वे भाव में शुभ ग्रह युक्त हो तो इतनी अधिक अनिष्टकारी नहीं होती।