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|| Free Gun Milan || वैदिक ज्योतिष के मुताबिक वसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती का विशेष पूजन किया जाता है। इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, पद भार, विद्यारंभ, वाहन, भवन खरीदना आदि कार्य अति शुभ और विशिष्ट होते हैं। और इस दिन से शादी के मुहूर्त भी शुरू हो जाते है।और विवाह को शास्त्रों में सबसे पवित्र बंधन माना जाता है। विवाह का यह पवित्र रिश्ता जीवन भर का होता है. और इसीलिए वर वधु की कुंडली को मिलाना बहुत जरूरी होता है.

कुंडली मिलान से वर वधु दोनों के सूझ बुझ , निर्णय शक्ति , प्रेम , अनुराग, आयु आदि कई बातो का पता चलता है की वर वधु सुखी होंगे या नहीं।

कभी कभी बिना कुंडली मिलान के विवाह हो जाते है। बाद में उन्हें परस्पर अलगाव की स्तिथि उत्पन हो जाती है।

कुंडली मिलान को अधिकतर लोग एक सरसरी निगाह से देखते हैं. उनकी नजर में जितने अधिक गुण मिलते हैं उतने अच्छा होता है जबकि यह बिलकुल गलत है. कई बार 36 में से 36 गुण मिलने पर भी वैवाहिक सुख का अभाव रहता है क्योंकि गुण मिलान तो हो गया लेकिन जन्म कुंडली का आंकलन नहीं हुआ.

शादी के लिए कुंडली मिलते समय मांगलिक होने के साथ साथ कन्या और वर की कुण्डली में वर्ण, वश्य, तारा, योनि, ग्रहमैत्री, गण, भकूट तथा नाड़ी इन आठों बातों का विषेश रूप से विचार किया जाता है। 
वर्ण का १, वश्य के २, तारा के ३, योनि के ४, ग्रहमैत्री के ५, गण के ६, भकूट के ७, तथा नाड़ी के ८ गुण उत्तरोत्तर वृद्धि से ग्रहण किये जाते हैं।


गुण मिलान के आठ अंग होते है और इन आठ अंगो को कूट कहते है। इसीलिए संस्कृत में इसे अष्टकूट मिलान कहते है. और ये ऐसे होते है जैसे की वर्ण का १, वश्य के २, तारा के ३, योनि के ४, ग्रहमैत्री के ५, गण के ६, भकूट के ७, तथा नाड़ी के ८ गुण उत्तरोत्तर वृद्धि से ग्रहण किये जाते हैं।

इस प्रकार इन सभी गुणों योग ३६ होता है। इनमें अंतिम के तीन गुण सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।

ऐसा इसलिए क्योंकि इनके कुल गुण मिलकर सभी 8 कूट में सबसे ज्यादा
(21= नाड़ी-8 भकूत-7 गण-6)
और सभी गुणों का 58
प्रतिशत होते हैं। यही कारण है कि कुंडली मिलान में इन तीन को 'महादोष' कहा गया है। http://bit.ly/2DubfNM