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    Vedic Astrology Dhan Yog Horoscope,Kem drum yog, Raaj Yog
    यदि आप भी गरीबी या आर्थिक संकट, संघर्ष, अशिक्षा, मुर्खता, संतानहीनता, वैवाहिक जीवन में दुःख, घर से दुरी, अपयश, मन का भटकना, असंतुष्टि, परिवार वालों से नाराजगी इन सब समस्याओं से परेशान है तो देखिये की क्या आपकी कुंडली में केमद्रुम योग ( Kemdurum yog ) तो नहीं।  योग के साथ साथ हम आपकी कुंडली में बने तीन दोष (कालसर्प दोष , मंगल दोष , आदि ) बतायंगे की आपकी कुंडली में है या नहीं और साथ ही में उन्हें दूर करने के उपाय भी।
    ज्यो‌त‌िषशास्‍त्र में हजारों योग बताए गए हैं। इनमें कुछ अशुभ फल देने वाले होते हैं तो कुछ शुभ।
    जन्मकुंडली ( Janm Kundli )में शुभ और अशुभ दोनों तरह के योग होते हैं। यदि शुभ योगों की संख्या अधिक है तो साधारण परिस्थितियों में जन्म लेने वाला व्यक्ति भी धनी, सुखी और पराक्रमी बनता है, लेकिन यदि अशुभ योग अधिक प्रबल हैं तो व्यक्ति लाख प्रयासों के बाद भी हमेशा संकटग्रस्त ही रहता है।
    कुंडली ( Kundli )में शुभ ग्रहों पर अशुभ ग्रहों की दृष्टि या शुभ ग्रहों से अधिक प्रबल अशुभ ग्रहों के होने से दुर्योगों का निर्माण होता है।
    कुंडली में हम सामान्यतः राज योगों की ही खोज करते हैं, किन्तु कई बार स्वयं ज्योतिषी व कई बार जातक इन दुर्योगों को नजरअंदाज कर जाता है,जिस कारण बार बार संशय होता है की क्यों ये राजयोग ( Raj Yog ) फलित नहीं हो रहे.
    आज ऐसे ही योग के बारे में बात करते है जिनके प्रभाव से जातक कई योगों से लाभान्वित होने से चूक जाते हैं.
    केमद्रुम योग जिन भी जातक की कुंडली ( Kundli )में ये योग बनता है उन्हें गरीबी या आर्थिक संकट, संघर्ष, अशिक्षा, मुर्खता, संतानहीनता, वैवाहिक जीवन में दुःख, घर से दुरी, अपयश, मन का भटकना, असंतुष्टि, परिवार वालों से नाराजगी और नीचे स्वभाव इत्यादि जैसी चीजों का सामना करना पड़ता है. साथ ही ऐसे लोग दूसरों पर अधिक निर्भर रहते है किन्तु ऐसे लोगों को दीर्घायु की भी प्राप्ति होती है.
    इस योग का मुख्य प्रभाव यह है कि इसके कारण जातक की आर्थिक स्थिति बदतर हो जाती है। उसकी आय के सभी साधन बंद हो जाते हैं।
    इस योग का निर्माण चंद्र के कारण होता है। जब आपकी कुंडली में चंद्र द्वितीय या द्वादश भाव में हो और चंद्र के आगे और पीछे के भावों में कोई अपयश ग्रह न हो तो केमद्रुम योग का निर्माण होता है।
    लेकिन ज्योतिष शास्त्र में कुछ भी असंभव नहीं है और बात अगर भाग्य की हो तो कहा जाता है कि किसी का भाग्य पलटने में देर नहीं लगती। ऐसा ही केमद्रुम योग ( Kemdurum yog)के बारे में भी है। कुछ ऐसी विशेष दशाएं भी जातक की कुंडली में बनती हैं जिनमें केमद्रुम योग के अशुभ प्रभाव कम हो जाते हैं बल्कि कई बार तो बिल्कुल समाप्त होकर शुभ फल देने वाले हो जाते हैं।
    ऐसा तब होता है जब कुंडली ( Kundli ) में लग्न से केंद्र में चंद्रमा या कोई ग्रह हो तो केमद्रुम अप्रभावी हो जाता है। चंद्रमा सभी ग्रहों से दृष्ट हो या चंद्रमा शुभ स्थान में हो या चंद्रमा के शुभ ग्रहों से युक्त हो या फि पूर्ण चंद्रमा लग्न में हो अथवा दसवें भाव में उच्च का हो अन्यथा केंद्र में पूर्ण बली हो तो भी केमद्रुम योग भंग हो जाता है। सुनफा अनफा या दुरुधरा योग यदि कुंडली में बन रहे हों तो भी केमद्रुम योग भंग माना जाता है। चंद्रमा से केंद्र में अन्य ग्रह के होने पर भी केमद्रुम योग के अशुभ प्रभाव भंग हो जाते हैं।