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    • 1
    जाने अपने कुंडली ( Kundli ) के 12 भाव का विष्लेशर
    जाने
    अपने कुंडली
    ( Kundli ) के
    12 भाव
    का विष्लेशर



    कहते
    हैं की हमारे जन्म से पहले ही
    हमारा भाग्य तय हो जाता है और
    यह भाग्य जन्म के बाद कुंडली
    (Kundli )यानी
    जन्मपत्री के साथ जुड़ जाता
    है। इसलिए यह बहुत ज़रूरी हो
    जाता है की जिससे हमारा भाग्य
    जुड़ा हुआ है हमें उसकी जानकारी
    हो।


    ज्योतिष
    से जीवन के रहस्य खोलने के लिए
    जन्म समय के अनुसार कुण्डली
    बनाना जरूरी होता है,


    कुंडली
    के द्वारा आप बहुत कुछ जान
    सकते है जैसे की आपके आने वाले
    दिन कैसे होंगे,
    आपका
    वैवाहिक जीवन कैसा होगा,
    आपकी
    नौकरी कब लगेगी ऐसी बहुत सी
    बाते है जो आप जान सकते है.


    और
    इन्ही सब बातो को जानने के लिए
    आप ज्योतिष के पास जाते है और
    अपनी कुंडली का विस्लेसन
    करवाते है।


    भारतीय
    ज्योतिष में किसी भी व्यक्ति
    का भूत ,भविष्य
    और वर्तमान उसकी कुंडली से
    पता चल सकता है।


    जब
    हमारी कुंडली
    (Kundli
    ) से
    ही हमारा भूत,
    भविष्य
    और वर्तमान जुड़ा हुआ है तो
    क्यों न हम इसकी पूर्ण जानकारी
    ले लें।


    जन्म
    कुंडली में बारह भाव होते हैं
    और हर भाव में एक राशि होती
    है.
    कुँडली
    के सभी भाव जीवन के किसी ना
    किसी क्षेत्र से संबंधित होते
    हैं.


    जैसे
    की पहला भाव तन,
    दूसरा
    धन,
    तीसरा
    सहोदर,
    चतुर्थ
    मातृ,
    पंचम
    पुत्र,
    छठा
    अरि,
    सप्तम
    रिपु,
    आठवाँ
    आयु,
    नवम
    धर्म,
    दशम
    कर्म,
    एकादश
    आय तो द्वादश व्यय भाव कहलाता
    है़.इससे
    आप अपनी नौकरी(Job
    )
    पैसा
    ( Money ),
    बिज़नेस
    ( Bussiness) ,
    शादी
    आदि के बारे में सब कुछ जान
    सकते है।


    इन
    12
    भावो
    के आधार पर ही ज्योतिष आपके
    प्रश्नो का उत्तर देते है.


    जैसे
    की दसम भाव जिसे कर्म भाव कहा
    जाता है। इसके स्वामी को दशमेश
    या कर्मेश कहा गया है। दशम भाव
    से व्यक्ति की आजीविका का
    विचार किया जाता है।
    अर्थात्
    व्यक्ति सरकारी नौकरी (
    Government Job ) करेगा
    अथवा प्राइवेट,
    या
    व्यापार करेगा तो कौन सा,
    उसे
    किस क्षेत्र में अधिक सफलता
    मिलेगी।


    जैसे
    की कमाई के लिए कुंडली में
    ग्यारहवां भाव देखना होगा।
    इससे आने वाले धन और आय-व्यय
    का अंदाजा लगाया जा सकता है।


    इसीलिए
    Foresight
    ने
    एक P1
    मॉडल
    बनाया है जिसमे की हम आपको
    आपकी कुंडली में चार्ट जैसे
    की लगन,
    नवांश
    आदि होते है।और साथ में हम
    आपकी कंडली (Kundli)
    का
    विश्लेषण करते है और उसमे आपको
    बताया जायगा की आपको कौन सा
    बिज़नेस करना चाहिए आपको किस
    चीज के बिज़नेस में लाभ होगा
    आपकी शादी कैसे होगी कैसा
    रहेगा आपका वैवाहिक जीवन और
    अपने भविष्य के बारे में सब
    कुछ जान सकते है।इसमें आप
    भविष्यवाणियों (Predication)
    के
    साथ अपनी राशि प्राप्त कर सकते
    हैं.और
    यह आपको पूर्ण हिन्दी,
    अंग्रेजी,
    बंगाली
    ,
    गुजराती
    और मराठी में भी उपलब्ध करती
    हैं।


    इसके
    द्वारा आपको ज्योतिष से बार
    बार अपनी कुंडली (Kundli)
    को
    दिखाने नहीं जाना पड़ेगा क्यूंकि
    इस के द्वारा आप अपनी शादी,
    करियर,
    जॉब,
    बिज़नेस
    सबके बारे में जान सकेंगे और
    जब भी आपका मन करे आप तब उसे
    पड़ सकेंगे.


    • 1
    Yoga's in horoscope as per vedic Astrology
    आज ही अपने कुंडली (Kundli ) में बने योग को जाने |  जीवन में भौतिक सुख-सुविधाएं, धन, संपत्ति, वाहन आदि कौन नहीं चाहता। कई लोगों को ये सब पैतृक रूप से प्राप्त हो जाता है, तो कई लोग इन्हें पाने के लिए जीवनभर कठिन परिश्रम करते रहते हैं। इसके बावजूद सफलता कुछ ही लोगों के हाथ लग पाती है।
    ये सब होता है आपकी कुंडली में बने योग के कारण , योग तब बनते है जब दो या दो से अधिक ग्रह जब किसी राशि में साथ-साथ या किसी निश्चित अंतर पर रहते हैं और एक दूसरे को प्रभावित करते हैं।
    ज्यो‌त‌िषशास्‍त्र में हजारों योग बताए गए हैं। इनमें कुछ अशुभ फल देने वाले होते हैं तो कुछ शुभ।
    कुंडली में ऐसे अनेक योग होते हैं जो व्यक्ति को जमीन से उठाकर शीर्ष तक पहुंचा सकते हैं और कई ऐसे योग भी होते हैं जो व्यक्ति को शीर्ष से फर्श पर लाकर पटक देते हैं। निश्चित रूप से कर्म की अपनी महत्ता है लेकिन भाग्य का साथ होना भी आवश्यक है।
    लेकिन आज यहां हम आपको ऐसे योगों के बारे में बता रहे है ज‌िनके कुंडली में होने का मतलब है व्यक्त‌ि धनवान होने के साथ ही महान व्यक्त‌ित्व का भी स्वामी होगा।
    आपकी जन्मकुंडली (Janm Kundli )में धन सुख या धनी बनने के लिए राजयोग (Raj yog ), गजकेसरी योग, चन्द्र-मंगल योग, पञ्च महापुरुष योग आदि होना चाहिए।
    लेकिन आज हम बात क्र रहे है राज योग की राज योग का अर्थ राजा बनने से नहीं है, बल्कि इसके द्वारा मान-सम्मान, यश, पद, प्रतिष्ठा, अर्थ लाभ, तरक्की और जीवन के लिए जरूरी सुख-सुविधाएं आसानी से उपलब्ध होने का विश्लेषण किया जाता है।
    अर्थात ज्योतिष के अनुसार राजयोग का अर्थ है कुंडली में एक ऐसा योग जो राजा के सामान सुख प्रदान करने वाला हो.
    जिस व्यक्ति की कुंडली में राजयोग (Raj yog ) होता है वह व्यक्ति हर प्रकार की सुख-सुविधा और लाभ प्राप्त करता हैं।
    वह उच्च स्तरीय राजनेता, मंत्री, किसी राजनीतिक दल के प्रमुखया कला और व्यवसाय में खूब मान-सम्मान प्राप्त करते हैं।
    ये योग तब बनता है जब जन्म कुंडली के नौवें या दसवें घर में अच्छे ग्रह मौजूद रहते हैं.
    या अगर कुंडली में सप्तम भाव का स्वामी ग्रह अगर पंचम या नवम भाव में बेठा हो, या फिर पंचमेश या नवमेश सप्तम भाव में बैठे हो, या युति या दृष्टि सम्बन्ध बना रहे तो राजयोग का निर्माण होता है .
    इसीलिए Foresightindia ने एक Y1 मॉडल प्रस्तुत किया है.जिसमे आप जान सकते है की आपकी कुंडली (Kundli )में क्या योग है.विवाह योग संतान , माता पिता योग,धन योग ( Dhan yog ), विदेश योग और राज योग है या नहीं और अगर ये योग है तो कब तक है और इन योगो से आपके जीवन पर क्या प्रभाव रहेगा.

    For more information please visit our website:Foresight System Ltd.