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    Know the Angarak Yoga Made In Your Horoscope
    || जानिये अपनी कुंडली में बने अंगारक योग ||अगर आप भी अपनी नौकरी व व्यवसाय में बाधा ,धन की कमी, शारीरिक, मानसिक परेशानी आदि समस्याओ से परेशान है और उनके बारे में और अपनी कुंडली के सारे अच्छे और बुरे योग और उनका अपने ऊपर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में जानना चाहते है तो आज ही डाउनलोड करे और पाए 40% ऑफ. यानि की 250 की रिपोर्ट सिर्फ 150rs में , 150rs में जाने अपनी कुंडली के सारे अच्छे और बुरे योग (yog) और उनका आपके जीवन पर कब कैसे और क्या प्रभाव पड़ेगा इसकी पूरी रिपोर्ट।आपकी जीवन में ये सब आपकी कुंडली में बने योग के कारण होता है।शायद ये अंगारक योग (Angarak  yog )के कारण भी हो सकता है।ज्यो‌त‌िषशास्‍त्र में हजारों योग (yog)बताए गए हैं। इनमें कुछ अशुभ फल देने वाले होते हैं तो कुछ शुभ।यदि शुभ योगों की संख्या अधिक है तो साधारण परिस्थितियों में जन्म लेने वाला व्यक्ति भी धनी, सुखी और पराक्रमी बनता है, लेकिन यदि अशुभ योग अधिक प्रबल हैं तो व्यक्ति लाख प्रयासों के बाद भी हमेशा संकटग्रस्त ही रहता है।कुंडली (Kundli)में अशुभ योगों के कारण जातक के जीवन में धन का अभाव, रोग, कर्जा, पारिवारिक कलह, व्यापार में घाटा, नौकरी में परेशानी, संतान सुख की कमी अथवा संतान से कष्ट, धन हानि, संपत्ति को नुक्सान, मेहनत के बावजूद असफलता जैसी समस्याएं आने लगती हैं। ऐसा ही एक अशुभ योग है अंगारक योग।यह मंगल राहु केतु के योग से बनने वाला योग (yog)है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली (kundli )में राहु या केतु के साथ मंगल की युति हो तो अंगारक योग बनता है।ज्योतिषशास्त्र में इस योग को अशुभ फल देने वाला बताया गया है। लेकिन वास्तव में यह योग सदैव ही अशुभ फल नही देता। इस योग के शुभ-अशुभ फल इस योग की स्थिति पर निर्भर करते है कि यह योग किस प्रकार और कैसी स्थिति में बन रहा है। उसी के अनुसार उतनी ही मात्रा में इस योग के शुभ-अशुभ फल होते है।यदि मंगल शुभ होकर अशुभ राहु या अशुभ केतु से सम्बन्ध बनाता है तो इस योग के अशुभ फल ही प्राप्त होंगे।इसके विपरीत मंगल और राहु-केतु (Rahu - Ketu)तीनो कुंडली (Kundli )में शुभ स्थिति में स्थित होकर योग बनाते है तो इस योग के अधिकतर शुभ फल ही प्राप्त होते है।इस योग (yog) की पहचान जातक के व्यवहार से ही की जा सकती है। क्यूंकि इसके प्रभाव में जातक अत्यधिक क्रोध करने लगता है।वह अपना कोई भी निर्णय लेने में असक्षम होते हैं लेकिन यह जातक न्यायप्रिय होते हैं।यह योग होने से धन की कमी रहती है। इसके प्रभाव में जातक की दुर्घटना की संभावना होती है। वह रोगों से ग्रस्त रहता है एवं उसके शत्रु उन पर काले जादू का प्रयोग करते हैं। व्यापार और वैवाहिक जीवन पर भी अंगारक योग का बुरा प्रभाव पड़ता है।और इस योग का सबसे ज्यादा घातक प्रभाव पति – पत्नी के संबंधो पर दिखाई देता है। उनके गृहस्थ जीवन में वाद- विवाद, पति-पत्नी का रुग्ण रहना, वैधव्य योग, कौटूम्बिन- अशांति,आदि, अशुभ फल प्राप्त होना संभव होता है। 
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    In your horoscope, one of these auspicious yoga will become great and wealthy
    अगर आप जानना चाहते है की आपकी कुंडली में योग है या नहीं अगर है तो कौन सा है और उसका आपको क्या लाभ मिलेगा तो जानने के लिए आप आज ही Foresight Systems Ltd.यहाँ से डाउनलोड करे 
    ज्योतिषशास्त्र में कई शुभ योगों का जिक्र किया गया है. कुछ शुभ योगों को राजयोग की श्रेणी में रखा गया है. 
    कुंडली के कुछ ऐसे योग बताए गए हैं, जिन्हें राज योग ( Yog )कहा जाता है। ये योग जिन लोगों की कुंडली में बन जाते हैं, वे किसी राजा के समान सुख प्राप्त करते हैं।
    जीवन में भौतिक सुख-सुविधाएं, धन, संपत्ति, वाहन आदि कौन नहीं चाहता। कई लोगों को ये सब पैतृक रूप से प्राप्त हो जाता है, तो कई लोग इन्हें पाने के लिए जीवनभर कठिन परिश्रम करते रहते हैं। इसके बावजूद सफलता कुछ ही लोगों के हाथ लग पाती है।
    ये सब होता है आपकी कुंडली में बने योग के कारण , योग तब बनते है जब दो या दो से अधिक ग्रह जब किसी राशि में साथ-साथ या किसी निश्चित अंतर पर रहते हैं और एक दूसरे को प्रभावित करते हैं।
    कुंडली में ऐसे अनेक योग होते हैं जो व्यक्ति को जमीन से उठाकर शीर्ष तक पहुंचा सकते हैं और कई ऐसे योग भी होते हैं जो व्यक्ति को शीर्ष से फर्श पर लाकर पटक देते हैं।योग व्यक्ति के जीवन पर शुभ, अशुभ व माध्यम परवाह डालते है
    योग का आंकलन करने के लिए जन्म कुंडली (Janm Kundli ) में लग्न को आधार बनाया जाता है। कुंडली की लग्न में सही ग्रह मौजूद होते हैं तो योग का निर्माण होता है।
    ज्योतिष की दुनिया में जिन व्यक्तियों की कुण्डली में योग निर्मित होता है, वे उच्च स्तरीय राजनेता, मंत्री, किसी राजनीतिक दल के प्रमुखया कला और व्यवसाय में खूब मान-सम्मान प्राप्त करते हैं। इन्हीं कारणों से लोगों में यह जानने की उत्सुकता रहती है कि क्या उनकी कुण्डली में कोन सा योग है. और अगर उन्हें इसका क्या फल मिलेगा.
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    check what will be the effect in our kundli
    आपके जीवन में शनि की सादे साती और ढईया कब कब चलेगी और उसमे आपके साथ क्या क्या होगा और उसके उसके उपाय तो आप यहाँ से अपनी शनि की साढ़े साती की रिपोर्ट डाउनलोड (Download )करे |
    शनि (Shani ) की साढ़े साती और शनि की ढैय्या के प्रति लोगों के हृदय में डर की भावना बनी हुई है।शनि की साढ़े सातीvedic astrologyके अनुसार नवग्रहों में से एक ग्रहशनि की साढ़े सात वर्ष चलने वाली एक प्रकार की ग्रह दशा होती है।और शनि एक राशि से गुजरने में ढ़ाई वर्ष का समय लेता है जिसे शनि (Shani) की ढैय्या कहते है.शनि साढ़े साती” और “शनि की ढैय्या” की गणना चंद्र राशि के अनुसार अर्थात जन्म के समय जिस राशि में चंद्रमा होता है तब से की जाती है .Vedic Astrology के अनुसार शनि की साढ़े साती तब बनती है जब शनि गोचर में जन्म चन्द्र से प्रथमद्वितीय और द्वादश भाव से गुजरता है।इस तरह तीन राशियों से गुजरते हुए यह साढ़े सात वर्ष का समय लेता है जिसे साढ़े साती कहा जाता है। सामान्य अर्थ में साढ़े साती का अर्थ हुआ सात वर्ष छमास।और शनि एक राशि से गुजरने में ढ़ाई वर्ष का समय लेता है जिसे शनि की ढैय्या कहते हैऔर ढैय्या का अर्थ हुआ ढ़ाई वर्ष।शनि (Shani) को ग्रहों में सर्वोच्च न्यायाधीश कहा गया है जो अनुचित कार्य करने वालों को समय आने पर दंड देता है। यह वह ग्रह है जो राजा को रंक बना देता है और जमीन से आसमान पर भी ले जाता है। यह शत्रु भी है और मित्र भी।साढ़े सात साल की साढ़ेसाती और ढाई साल की ढैय्या के वक्त में शनिदेव जातक को उसके कर्मों का फल देना आरंभ कर देते हैं।हर व्यक्ति के जीवन में शनि की साढ़ेसतीतीन बार आती है.1.बचपन में 2.युवावस्था में 3.वृधावस्था में.|
    प्रथम का प्रभाव शिक्षा परदूसरी बार का प्रभाव धनमान-सम्मानरोजगार आदि पर और तृतीय का प्रभाव आयु व स्वास्थ्य पर पड़ता है.
    शनि किसी के जीवन में क्या फल देगाशुभ प्रभाव होंगे या अशुभ इसका विवेचनकुंडली के 12 भावों, 12 राशियों, 27 नक्षत्रोंशनि की दृष्टिउसकी गति,जातक की दशागोचरसाढ़ेसाती या ढैय्याग्रह के नीचउच्च या शत्रु होने या किसी अन्य ग्रह के साथ होनेग्रह की डिग्रीविशेष योगोंकुंडली के नवांश आदि के आधार पर किया जाता है.