• Tipping Interests
    astrology

Recent Activity

  • posted
  • posted
  • posted
  • posted
    X
  • posted

Lists

  • -1 2 items

Posts

    • 1
    know your Raj yog,dhan yog in kundli
     A
    Yoga is a special disposition of  planets in a vedic astrology,
    which can produce very specific results. There are hundreds of yoga
    mentioned in vedic astrology. We have compiled a list of around 1200+
    yogas.

    Ex-Yogas
    Amla
    Yog - You will get fame, honoured by state, Loved by
    relations.

    Parijat
    Yog- you will be happy in the middle and towards end
    of your life, devoted to the preformance of your religious duties.

    Dhan
    yog- You will  be endowed with riches.

    Dhenu
    Raj Yog- You will  be endowed with learning,
    all round prosperity and all kinds of wealth, enjoy rich food and
    belong to happy.
    • 1
    Know what is the future of your child and which field make a carrier.
    Know
    what is the future of your child and which field make a carrier.


    All these questions about your child are whether their health will
    improve or not, in which area the children will grow, how their
    education will be, how will their future be, what will they go to?


    For download Report here
    now: Foresight Systems Ltd.
     In
    Hindu culture, it is said that children should be born to attain
    liberation from debt.


    You
    have the opportunity to grow in your child's horoscope and the
    future of your child. They can know everything.


    If
    Mars will be under the influence of Rahu or will be under the
    influence of Mars Saturn, then the child will become a criminal.


    Like
    Mercury and Jupiter combines money, it means if your child is the sum
    of these two planets in the horoscope then the child can go to the
    finance sector.


    If
    Mercury is weak here then it can be in the banking sector but it may
    be that it does not look at accounts, see marketing or
    administration.


    If Mars will be under the influence of Rahu or will be under the
    influence of Mars Saturn, then the child will become a criminal.
    • 1
    Foresight Astrology Online kundli Rashi bhavishya horoscope in hindi
    कुंडली
    दिखाते समय हर व्यक्ति की यही
    इच्छा रहती है मेरी कुंडली
    में ग्रहो की क्या स्थिति है,
     


    महादशा
    एवं अन्तर्दशा
    के कारण ही आपके
    जीवन में परिवर्तन आते है और
    कई परिवर्तन ऐसे होते है की
    जिससे की आपका जीवन ही बदल
    जाता हैं।नव ग्रहो में प्रत्येक
    ग्रह की महादशा-अन्तर्दशा
    का एक निश्चित समय होता है।जैसे
    की सूर्य की महादशा 6वर्ष,
    चंद्र
    की महादशा 10
    वर्ष,
    मंगल
    की महादशा 7वर्ष,
    राहु
    की महादशा 18वर्ष,
    गुरु
    की महादशा 16वर्ष,
    शनि
    की महादशा 19वर्ष,
    बुध
    की महादशा 17वर्ष,
    केतु
    की महादशा 7वर्ष,
    शुक्र
    की महादशा 20वर्ष
    की होती है।ग्रहो की महादशा
    के समय कुछ समय के लिए बीच बीच
    में ग्रहो की अन्तर्दशाये भी
    आती है जो अपना प्रभाव दिखाती
    है।ज्यादातर लोग दशा और महादशा
    को एक ऐसा समय मानते हैं जिसमे
    उनको कोई दुःख या हानि की
    प्राप्ति होती है लेकिन ऐसा
    नहीं है,
    ज्योतिष
    में दशा और महादशा का सिर्फ
    एक ही मतलब होता है और वो है
    समय,
    मतलब
    अगर किसी ग्रह की दशा या महादशा
    चल रही है तो उस ग्रह का समय
    चल रहा है न की आप उस ग्रह की
    वजह से परेशान हैं |
    know more visit:https://www.foresightindia.com/basichoro/MAHADASA
    • 1
    जानिये अपनी कुंडली से अपने भूत भविष्य और वर्तमान के बारे में
    अगर
    आप भी अपने विवाह,
    जीवनसाथी,
    नौकरी
    ,प्रमोशन,
    भूत
    भविष्य और वर्तमान आदि के बारे
    में जानना चाहते है तो आज
    ही Foresight Systems Ltd यहाँ
    से अपना नवमांस रिपोर्ट डाउनलोड
    करे |
     जन्म
    कुण्डली के आधार पर आपको आपके
    भूत,
    वर्तमान
    और भविष्य के बारे में पता चल
    सकता है.


    सभी
    का भविष्य अलग होता है.
    कोई
    सुखी तो कोई दुखी रहता है अथवा
    किसी को मिश्रित फल जीवन में
    मिलते हैं.


    किसी
    भी बात के होने में कुण्डली
    के योग और जिस ग्रह की दशा/अन्तर्दशा
    चल रही होती है वह महत्व रखती
    है.


    बहुत
    बार ऐसा होता है की जन्म कुण्डली
    में योग अच्छे बने होते हैं
    और ग्रह भी बली अवस्था में
    होते है लेकिन फिर भी व्यक्ति
    को शुभ फल नहीं मिलते हैं.


    क्योकि
    ग्रह वर्ग कुण्डली में कमजोर
    हो जाता है इसलिए ही वैदिक
    ज्योतिष में वर्ग कुण्डलियों
    का अत्यधिक महत्व माना जाता
    है.
    जन्म
    कुण्डली में मौजूद फलो का
    स्वाद वर्ग कुण्डलियो से ही
    मिलता है
    कुंडली
    के बारे में जानते -पढ़ते
    -सुनते
    समय नवमांश कुंडली का जिक्र
    आप लोगों ने कई बार सुना
    होगा।सामान्यतः आप सभी को
    ज्ञात है कि कुंडली में नवें
    भाव को भाग्य का भाव कहा गया
    है। यानि आपका भाग्य नवां भाव
    है। इसी प्रकार भाग्य का भी
    भाग्य देखा जाता है ,जिसके
    लिए नवमांश कुंडली की आवश्यकता
    होती है। जैसे आपके विवाह के
    लिए नवांश कुंडली देखते है.


    नवांश
    कुण्डली अथवा D-9
    कुण्डली
    अत्यधिक महत्वपूर्ण कुण्डली
    है वैसे तो इसे जीवनसाथी के
    लिए देखा जाता है कि वह कैसा
    होगा और उसके साथ संबंध कैसे
    रहेगे आदि बातें देखी जाती
    हैं.
    लेकिन
    इस कुण्डली को जीवन के हर
    क्षेत्र के लिए भी देखा जाता
    है.
    जो
    योग जन्म कुण्डली में बनते
    हैं उनकी पुष्टि इस कुडली में
    होती है.


    जन्म
    कुण्डली शरीर है तो नवांश
    कुण्दली को आत्मा माना जाता
    है.यदि
    बिना नवमांश कुंडली देखे केवल
    लग्न कुंडली के आधार पर ही फल
    कथन किया जाए तो फल कथन में
    त्रुतिया रह सकती है या फल कथन
    गलत भी हो सकता है।


    अगर
    जन्मकुंडली का सप्तमेश और
    नवांश कुंडली लग्न दोनों बली
    हों तो वैवाहिक जीवन सुखमय
    होता है।
    Know more visit : 
     https://www.foresightindia.com/basichoro/C1
    • 1
    What will be the effect of the Saturn Sati in your life
    अगर आप भी जानना चाहते है की आपकी साढ़े साती कब कब पड़ेगी , क्‍या प्रभाव होगा साढ़े साती का आपके जीवन में ,क्‍या आपके साढ़े सात साल का पूरा समय एक जैसा खराब होगा । अगर नहीं तो कौनसा समय अधिक कठिन होगा । और उसके उपाय के साथ साथ आपका भाग्य रतन कौन सा है और कौन सा रतन किस दिन किस ऊँगली में किस धातु के साथ पहनना चाहिए। आदि जानने के लिए अपनी शनि की सादे साती, और स्टोन की रिपोर्ट यहाँ से  Foresight Systems Ltd. डाउनलोड करे सिर्फ  Rs: 90 में | शनि की साढ़े साती के प्रति लोगों के हृदय में डर की भावना बनी हुई है।
    शनि की साढ़े साती, Vedic astrology के अनुसार नवग्रहों में से एक ग्रह, शनि की साढ़े सात वर्ष चलने वाली एक प्रकार की ग्रह दशा होती है।
    कहा जाता है की जिस दिन शनि किसी विशेष राशि में होता है उस दिन से शनि की साढ़े साती शुरू हो जाती है। सामान्य अर्थ में साढ़े साती का अर्थ होता है सात वर्ष छ: मास।
    Vedic Astrology के अनुसार शनि की साढ़े साती तब बनती है जब शनि गोचर में जन्म चन्द्र से प्रथम, द्वितीय और द्वादश भाव से गुजरता है।
    इस तरह तीन राशियों से गुजरते हुए यह साढ़े सात वर्ष का समय लेता है जिसे साढ़े साती कहा जाता है। सामान्य अर्थ में साढ़े साती का अर्थ हुआ सात वर्ष छ: मास।
    और शनि एक राशि से गुजरने में ढ़ाई वर्ष का समय लेता है जिसे शनि की ढैय्या कहते है. और ढैय्या का अर्थ हुआ ढ़ाई वर्ष।शनि साढ़े साती” और “शनि की ढैय्या” की गणना चंद्र राशि के अनुसार अर्थात जन्म के समय जिस राशि में चंद्रमा होता है तब से की जाती है .
    शनि को ग्रहों में सर्वोच्च न्यायाधीश कहा गया है जो अनुचित कार्य करने वालों को समय आने पर दंड देता है। यह वह ग्रह है जो राजा को रंक बना देता है और जमीन से आसमान पर भी ले जाता है। यह शत्रु भी है और मित्र भी।
    हर व्यक्ति के जीवन में शनि की साढ़ेसती (Shani ke Sade Sati )तीन बार आती है. 1.प्रथम बार बचपन में,(Child ) 2 .युवावस्था में (Young )  3. वृधावस्था में (Old ). 
    प्रथम का प्रभाव शिक्षा पर, दूसरी बार का प्रभाव धन, मान-सम्मान, रोजगार आदि पर और तृतीय का प्रभाव आयु व स्वास्थ्य पर पड़ता है
    शनि किसी के जीवन में क्या फल देगा, शुभ प्रभाव होंगे या अशुभ , इसका विवेचन, कुंडली के 12 भावों, 12 राशियों, 27 नक्षत्रों, शनि की दृष्टि, उसकी गति,जातक की दशा, गोचर, साढ़ेसाती या ढैय्या, ग्रह के नीच, उच्च या शत्रु होने या किसी अन्य ग्रह के साथ होने, ग्रह की डिग्री, विशेष योगों, कुंडली के नवांश आदि के आधार पर किया जाता है.
    यदि किसी की कुंडली में शनि जन्‍म या लग्‍न राशि से बारहवें, पहले व दूसरे हो तो शनि की साढ़े साती होती है।